"i सम्यक" बद्दल थोडक्यात

सम्यक समाजासाठी ६ बिंदूचा संस्कार - स्व अध्ययन - सामुहीकता - समत्व - सेवा - स्वातंत्र्य - संघर्ष.या ६ बिंदूचा संस्काराशी संबधित सर्व क्षेत्रां(अर्थशास्त्र, सेवाकार्य, विचार दर्शन, इतिहास व इतर) वर वाचन-लेखन -चर्चा-कार्यशाळा-सेवा-अनुभव या साठी "i सम्यक"
Our aim is to provide Education to people for social reform. Our thinking is Self Study - Togetherness - Equality - Self less Service - Freedom - Fight for right is the 6 point for Rite of society.

अमीचंद मेहता



स्वामी दयानंद सरस्वती पंजाब में धर्मप्रचार कर रहे थे। झेलम में उनका प्रवचन चल रहा था। वे गृहस्थजनों को सात्विक जीवन बिताने तथा ईमानदारी से कमाई करने की प्रेरणा दे रहे थे। उनके प्रवचन के बाद वहां का एक व्यक्ति पहुंचा और उसने भजन सुनाने की इच्छा व्यक्त की। उस व्यक्ति का नाम अमीचंद था। स्वामी जी ने उन्हें भजन सुनाने की इजाजत दे दी। उसके सुंदर और सुरीले भजन को सुनकर न केवल श्रोता अपितु स्वामी जी भी झूम उठे। सभा समाप्त होने के बाद जब वह व्यक्ति चला गया तो किसी ने स्वामी जी को बताया, 'जिस व्यक्ति ने अभी-अभी भजन सुनाया, वह यहां तहसीलदार के पद पर है। भजन तो उसने बहुत सुंदर सुनाया, परंतु वह चरित्रहीन व भ्रष्ट है। उसने अपनी पत्नी को त्याग दिया है और रखैल को रखे हुए है। वह प्रतिदिन शराब व मांस का सेवन करता है, रिश्वत भी लेता है।' यह सुनकर स्वामी जी गंभीर हो गए। उन्होंने किसी को कुछ कहा नहीं। 

अगले दिन प्रवचन में वह व्यक्ति पहुंचा और उसने फिर भजन सुनाने की इच्छा व्यक्त की। स्वामी जी ने उसे भजन सुनाने की स्वीकृति दे दी। सभी हैरान रह गए, लेकिन किसी ने कुछ नहीं कहा। भजन की समाप्ति के बाद स्वामी जी ने कहा, 'अमीचंद, तुम हो तो हीरे पर कीचड़ में धंसे हो। तुम्हारे हृदय में प्रभु के प्रति श्रद्धा है, तुम्हारे शब्दों में भी आकर्षण है, परंतु जब तक तुम व्यक्तिगत जीवन को दुर्गुणों से मुक्त नहीं करोगे, तुम्हारा भजन सुनाना व्यर्थ है।' स्वामी जी के चंद शब्दों ने अमीचंद का जीवन बदल दिया। उसने घर पहुंचते ही शराब की बोतलें तोड़ डालीं। अगले ही दिन उसने पत्नी को प्रेमपूर्वक अपना लिया और रिश्वत न लेने का संकल्प लिया। आगे चलकर वही अमीचंद भजन गायक 'अमीचंद मेहता' के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

-संकलित

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