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COMPANY FORMATION से IPO तक का सफ़र-2

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Company Business funding के अलग अलग सोर्स

COMPANY BUSINESS FUNDING के अलग अलग सोर्स

Business funding का अर्थ है – व्यापर की पूंजी. (Business Capital)
आज का हमारा टॉपिक है – Business funding , इस टॉपिक में हम जानेंगे कि एक छोटे बिज़नस को बढ़ाने के लिए उसके पास पूंजी (Business Capital) के लिए क्या क्या सोर्सेज होते है, और वो उनका कब कब और कैसे इस्तेमाल करते है,
हमने इस से पहले COMPANY FORMATION की बात की थी, और ये समझा था कि स्टॉक मार्केट इन्वेस्टमेंट के लिए एक बिज़नस द्वारा उसके फण्ड सोर्सेज को समझना कितना जरुरी है, और बहुत ही शोर्ट में समझा बिज़नस के अलग अलग स्टेज पर पूंजी के सोर्सेज के बारे में समझा था,
आज उसी टॉपिक को साथ साथ आगे बढ़ाते हुए, बिज़नस के अलग अलग स्टेज और व्यापर की पूंजी (Business funding ) दोनों को Detail में समझेंगे,

BUSINESS FUNDING STAGE -1- PROMOTERS, ANGEL INVESTOR

अगर आपने कभी बिज़नस करने का सोचा होगा, तो आपके पास सबसे पहले एक बिज़नस आईडिया आता है, जैसे – school bag manufactring का आईडिया, हो सकता है कि आप जो बिज़नस करना चाहते है, उसके बारे में आपको अनुभव भी है, और साथ ही साथ आपको बहुत भरोसा है कि आपका बिज़नस बहुत सक्सेसफुल होगा,
इस आईडिया के साथ आपकी सबसे बड़ी दिक्कत ये होगी कि आप इस बिज़नस करने के लिए पैसे यानी पूंजी कहा से लायेंगे, बिज़नस शुरु करने के लिए आपको एक जगह किराये पर लेना होता है, कुछ रजिस्ट्रेशन, मशीन, और फर्नीचर की व्यस्था करनी होती है, आपको और आदमी रखने की जरुरत होती है, और ये सब Capital Expense होते है, और इसके लिए आपको पूंजी चाहिए होती है,
ऐसे में आपको दो तरह की पूंजी (Business funding) की आवश्यकता होती है –
  • Fixed Capital – जो पूंजीगत खर्चो के लिए लगने वाला फण्ड
  • Working capital– आप जिस चीज का व्यापार करना चाहते है, उसको खरीदने और बेचने से सम्बंधित लगने वाला फण्ड
अगर आप अपने आईडिया को बिज़नस रूप देना चाहते है, तो आपको खुद ही पूंजी की व्यस्था करनी होगी, क्योकि एक नया बिज़नस सक्सेसफुल होगा या नहीं, इस रिस्क के कारण कोई भी जल्दी पैसा नहीं लगाना चाहता,
ऐसे में हो सकता है,आप अपने पास जो भी बचत के पैसे है, वो या अपने करीबी परिवार या रिश्तेदार से पैसे लेकर शुरू करे,अगर आप इस तरह अपना बिज़नस शुरू करते है, तो आप जो भी कंपनी बनायेगे उसके प्रोमोटर कहे जायेंगे,

BUSINESS PROMOTER

ध्यान देने वाली बात है कि बिज़नस को शूरू करने वाले को PROMOTER कहा जाता है, और ऐसे में चुकी आप अकेले ही इस बिज़नस को शुरू कर रहे है, और अपने खुद की रिस्क पर पूंजी लगा रहे है, इसलिए आप भी इस बिज़नस के PROMOTER कहे जायेंगे,

ANGLE INVESTOR

अब मान लीजये कि अपने अपने बिज़नस की पूंजी की कमी को पूरा करने के लिए अपने दो दोस्तों को भी राजी कर लिया, और आपके वो दोस्त आपको बिज़नस फण्ड करने के लिए पैसे दे देते है,
तो ऐसे में बिज़नस फण्ड के बिलकुल शुरुआती दौर में आपके दोस्तों द्वारा लगाया पैसा LOAN नहीं बल्कि पूंजी के रूप में निवेशित किया जायेगा,
और आपके दोस्तों को ANGEL INVESTOR (एंजेल इन्वेस्टर) कहा जायेगा,

 SEED FUND या BUSINESS CAPITAL
यहाँ ध्यान देने वाली बात ये है कि आपने यानी PROMOTOR और ANGEL INVESTOR ने मिलकर जो INITIAL MONEY जुटाया है, मान लीजिये प्रमोटर और ANGEL INVESTOR ने मिलकर 10 लाख रूपये एकत्रित किये, और इस 10 लाख से अब बिज़नस की शुरुआत हो जाती है,
तो ऐसे में INITAL MONEY को BUSINESS CAPITAL के रूप में SEED FUND माना जायेगा,
SEED FUND को कंपनी के नाम से कंपनी खाते में रखा जाता है, ना कि प्रोमोटर या किसी और के खाते में, और जब पूरा SEED FUND कंपनी के अकाउंट में आ जाता है, तो अब उस पूंजी को शेयर पूंजी (SHARE CAPITAL) कहा जाता है,
और उस SEED FUND लाने वालो को कंपनी में हिस्सेदारी (शेयर) का सर्टिफिकेट दे दिया जाता है, यानी अभी तक जो हमने प्रोमोटर और एंजेल इन्वेस्टर की बात की ,उनको शेयर कैपिटल के आधार पर शेयर सर्टिफिकेट दे दिया जायेगा,

SHARE CAPITAL

हमने देखा प्रोमोटर और एंजेल इन्वेस्टर ने बिज़नस की शुरुआत के लिए जो भी पूंजी लाई, उस SEED FUND कहा गया, और जब SEED FUND को कंपनी के खाते में TRANSFER कर दिया तो या INTITAL BUSINESS FUND अब SHARE CAPITAL बन जाता है,
अब मान लीजिये,
कंपनी के पास कुल शेयर पूंजी है- 10 लाख रूपये, और प्रोमोटर और इन्वेस्टर ने मिलकर कमपनी की कुल पूंजी को 10 रूपये के FACE VALUE के शेयर को बाट देते है, यहाँ
तो ऐसे में कुल शेयर की संख्या होती है – 1 लाख शेयर
और प्रत्येक शेयर का मूल्य 10 रूपये

और इस प्रकार कंपनी की कुल पूंजी हो जाती है
SHARE CAPITAL = 1,00,000 X 10 = 10,00,000 रूपये
 Company Valuation
ऐसे में अभी जब कंपनी के पास सिर्फ 10 लाख रूपये ही है, और दूसरी कोई सम्पति नहीं है तो कंपनी का Valuation होगा – 10 लाख रूपये,
Valuation= कुल सम्पति – कुल दायित्व,
अभी कंपनी के पास कोई दायित्व नहीं है, सिर्फ 10 लाख रूपये है,
इस तरह एक कंपनी शेयर कैपिटल के साथ अपना बिज़नस करना शुरू करती है, और जैसे जैसे कंपनी का लाभ बढ़ता है, तो उसकी सम्पति भी बढती है और इस तरह उस कंपनी की वैल्यूएशन भी बढ़ने लगती है,

AUTHORIZED SHARE(CAPITAL)

हमने ऊपर जो 10 लाख के शेयर कैपिटल को 10 रूपये के फेस वैल्यू के साथ डिवाइड किया था, तो कंपनी के पास कुल शेयर हो गए थे – 1 लाख शेयर
अब इसी 1 लाख शेयर को कंपनी का AUTHORIZED SHARE(Capital) कहा जायेगा,
और authorized shares को कंपनी के प्रोमोटर्स और इन्वेस्टर्स के बीच डिवाइड किया जायेगा,
ध्यान देने वाली बात ये है कि जरुरी नहीं कंपनी के कुल शेयर को प्रोमोटर्स और इन्वेस्टर्स के बीच बाट दिया जाये, जैसे जरुरी नहीं सभी 1 लाख शेयर को तीनो के बीच डिवाइड किया जाये, ऐसा भी हो सकता है कि प्रोमोटर्स को 40% शेयर और Angle Investors को 10 -10 % शेयर दिया जाये और बाकि 40 % कंपनी के खाते में रखा जाये,

 ISSUED SHARE (CAPITAL)

हमने देखा authorized Capital से 40% शेयर प्रोमोटर्स को और 10 -10 % शेयर एंजेल इन्वेस्टर्स को दिया गया,
इस तरह कंपनी के 60% के शेयर को जो authorized capital से निकाला गया है,इसे ISSUED SHARE (Capital) कहा जाता है,
इसे ALLOTTED SHARE भी कहा जाता है,
और जो authorized शेयर, कंपनी ने अपने पास रखे है, इस केस में 40% शेयर्स को फ़िलहाल AUTHORIZED BUT NOT ALLOTTED कहा जायेगा,
 SHARE HOLDING PATTERN
शेयर होल्डिंग पैटर्न से हमारा मतलब इस बात से है कि ISSUED SHARE कितने और किसके पास है, जैसे ऊपर के बताये एक्साम्प्ल की बात की जाये तो, फ़िलहाल ISSUED SHARE HOLDING पैटर्न कुछ इस प्रकार होगा-
SR. NO.NO. OF SHARES OWNED BYSHAREHOLDING
1PROMOTER40%
2ANGLE INVESTOR -110%
3ANGLE INVESTOR -210%

BUSINESS FUNDING STAGE -2 – THE VENTURE CAPITALIST

जैसे जैसे बिज़नस आगे बढ़ता है, और लाभ कमाता है, तो कुछ साल बाद उस बिज़नस के मालिक प्रोमोटर्स और इन्वेस्टर्स उस बिज़नस को और अधिक बढ़ाना चाहते है,
जैसे अगर प्रमोटर्स और इन्वेस्टर्स ने अगर भारत के किसी एक शहर में है, तो वो ये सोचता है कि अगर मै अपनी कंपनी के ब्रांच अपने राज्य के दुसरे शहरो में भी खोलू तो कंपनी को और अधिक फायदा होगा, और बिज़नस बढ़ जायेगा,
इसके लिए फिर से Business funding की जरुरत होती है, और बिज़नस फंडिंग की आवश्यकता यानी पूंजी की आवश्यकता, और पूंजी की इस तरह के आवश्यकता के लिए कंपनी को नए निवेशक की जरुरत होती है, जो कंपनी को अपने बिज़नस को बढ़ाने के लिए पैसे दे और बदले में होने वाले फायदों में उसे भी कुछ हिस्सा दिया जाये,
अब क्योकि कंपनी ने एक शहर में अपना बिज़नस जमा लिया है, और लगातार लाभ कमा रही है, तो ऐसे में कम्पनी को कुछ बड़े निवेशक मिलने की सम्भावना होती है,और वो एक नए निवेशक को अप्प्रोच करती है, और जब उसे कोई बड़ा निवेशक मिल जाता है, जो कंपनी में शेयर के बदले निवेशक को तैयार हो जाता है,
इस STAGE पे निवेश करने वाले को VENTURE CAPITALIST (VENTURE कैपिटलिस्ट) कहा जाता है,
और इन शोर्ट इस तरीके से आने वाली फंडिंग को VC फंडिंग कहा जाता है,
जब कोई नया निवेशक आता है, तो उस समय कंपनी की वैल्यूएशन या कहे NET WORTH निकाला जाता है, और नए वैल्यूएशन के हिसाब से नए निवेशक द्वारा किये जाने वाले निवेश के बदले उसे शेयर दिया जाता है,
अब मान लेते है, जो बिज़नस 10 लाख से 4 साल पहले शुरू हुआ था, उस की वैल्यूएशन अभी 40 लाख हो चुकी है, तो ऐसे में VC फंडिंग 40 लाख के अनुपात में जितना निवेश करेगा, उतना उसे शेयर दिया जायेगा,
यानी उस कंपनी में 10% शेयर के बदले VC FUNDING से 4 लाख रूपये आने चाहिए,
अब ऐसे ही कंपनी जब भी नया निवेशक से शेयर के बदले पैसा लेना होगा, तो उसे current वैल्यूएशन को ध्यान में रखते हुए शेयर इशू कर सकता है,
VC की पहली निवेश को सीरीज A FUNDING,
और दूसरी बार VC से निवेश लेने पर , उसे नाम दिया जायेगा – सीरीज B FUNDING
जैसे ही कोई निवेशक , निवेश करता है, तो शेयर होल्डिंग पैटर्न  में कुछ नया या थोडा बदलाव देखने को मिलता है,
ध्यान देने वाली बात ये भी है, कोई पुराना निवेश अपने शेयर को कंपनी के CURRENT वैल्यूएशन के हिसाब से बेचकर बाहर भी निकल सकता है,
अगर हम जिस EXAMPLE की बात कर रहे है, उसमे NOT ALLOTTED AUTHORIZED SHARE से निकाल कर 10% शेयर VC को दिया जायेगा, और नया शेयर होल्डिंग पैटर्न कुछ इस तरह होगा-
SR. NO.NO. OF SHARES OWNED BYSHAREHOLDING
1PROMOTOR40%
2ANGLE INVESTOR -110%
3ANGLE INVESTOR -210%
4VENTURE CAPITALIST10%

BUSINESS FUNDING STAGE -3 – THE BANKERS

किसी भी बिज़नस के पास अपने BUSINESS को बढ़ाने के लिए BUSINESS FUND की हमेशा आवश्यकता होती है, और ऐसे में BANK से पैसे लेने का भी एक विकल्प होता है, और सभी बैंक बिज़नस लोन देती है,
ध्यान देने वाली बात ये है कि बैंक से लिया जाने वाला फण्ड एक LOAN होता है, जिसके ऊपर निश्चित दर से व्याज चुकाना होता है, और LOAN को चुकाने (REPAYMENT)  का भी एक दबाव बना रहता है, जो कि बिज़नस के लाभ को काम कर देता है,
इस तरह कंपनी के पास दुसरे सोर्सेज न होने पर बैंक से भी लोन लेती है, लेकिन एक निवेशक के लिए ध्यान देने वाली बात ये है कि बैंक से लिया जाने वाला बिज़नस फण्ड एक LOAN और DEBT की तरह होता है, और कंपनी के समापन की दशा में बैंक लोन को चुकाना कंपनी की प्राथमिकता होती है,साथ ही साथ किसी कंपनी के ऊपर ज्यादा बैंक लोन होने से उसकी लाभ कमाने की क्षमता में कम हो जाती है, और ये निवेशक के लिए अच्छी बात नहीं होती है,

BUSINESS FUNDING STAGE -4 PRIVATE EQUITY (PE)

एक कंपनी के पास BUSINESS FUNDING के लिए एक और विकल्प होता है, PRIVATE EQUITY, जिसे शोर्ट में PE भी कहा जाता है,
PRIVATE EQUITY को आप VENTURE CAPITALIST का बड़ा रूप समझ सकते है, और इसलिए इसको BUSINESS FUNDING की सीरिज में चौथा स्थान दिया गया है,
PRIVATE EQUITY आम तौर पर बड़ी बड़ी प्राइवेट फाइनेंस कंपनी होती है, जो कि किसी GROWING BUSINESS में INVESTOR के तौर पर निवेश करना चाहते है,
और एक कंपनी जिसका बिज़नस बढ़ता जा रहा है, उसे अपने बिज़नस को बढ़ाने के लिए और अधिक मात्रा में एक बड़े अनुपात में BUSINESS FUDING की आवश्यकता होती है,
और ऐसे में कंपनी के पास PRIVATE EQUITY का एक विकल्प होता है,
अब हमने ऊपर जो EXAMPLE देखा, उस केस में अगर PRIVATE EQUITY से भी निवेश के रूप में पैसा लेना हो तो, एक बार फिर कंपनी की NET WORTH (VALUATION) की गणना की जाएगी,
मान लेते है, कंपनी ने अगले दो साल में और अधिक लाभ कमाया है और अब कंपनी का वैल्यूएशन या NET WORTH अगर 1 करोड़ हो जाता है,
तो ऐसे PRIVATE EQUITY को कंपनी में 10% शेयर के लिए 10 लाख रूपये निवेश करने होंगे.
और कंपनी का कुल शेयर होल्डिंग पैटर्न कुछ इस प्रकार होगा-

SR. NO.NO. OF SHARES OWNED BYSHAREHOLDING
1PROMOTOR40%
2ANGLE INVESTOR -110%
3ANGLE INVESTOR -210%
4VENTURE CAPITALIST10%
5PRIVATE EQUITY10%

BUSINESS FUNDING STAGE -5 THE IPO

IPO- आईपीओ का हिंदी अर्थ – पब्लिक को कंपनी के शेयर खरीदने का आवेदन,
आईपीओ क्या होता है– इसके बारे में पूरी डिटेल में आप यहाँ पढ़ सकते है- LINK
यहाँ पर आईपीओ को इस सन्दर्भ में समझना जरुरी है, की एक कंपनी को जब बहुत ही बड़ी मात्रा में BUSINESS FUNDING की आवश्यकता होती होती है, तो उसे SEBI द्वारा बनाये नियम का पालन करते हुए PUBLIC से पूंजी प्राप्त करने के लिए अपने शेयर को स्टॉक मार्केट पर लिस्ट करवाना होता है,
और स्टॉक मार्केट पर LIST होने से पहले कंपनी को आईपीओ लाना होता है,

BUSINESS FUNDING – SUMMARY

हमने देखा कि एक कंपनी अपने शुरुआत से किस तरह से अपने बिज़नस को GROW करने के लिए अलग अलग तरीको से BUSINESS FUNDING की व्यस्था करती है, ऐसे में कंपनी द्वारा बिज़नस फंडिंग की अपनी बात को SUMMARIZE करे तो, एक कंपनी के पास अपने बिज़नस को बढ़ाने के लिए जो भी BUSINESS FUNDING की व्यस्था करती है, उसमे हर एक फण्ड सोर्स का अपना महत्व है,
हमने यहाँ BUSINESS FUNDING के इस टॉपिक से ये समझने की कोशिश की है कि किस तरह कंपनी अपने बिज़नस को बढ़ाने के लिए FUND ARRANGEMENT करती है, और किसी कंपनी के लिए फण्ड जुटाने का सबसे बड़ा सोर्स होता है- स्टॉक मार्केट के माध्यम से लोगो से पैसे लेना, और इसलिए कंपनी आईपीओ लाती है, और अपना बिज़नस करती है, और अपने निवेशको को उसका लाभ देती है,
एक निवेशक के नाते हमें बिज़नस की शुरुआत से IPO तक के सफ़र को ध्यान मेर रखना जरुरी है, जिस से कम्पनी अपने बिज़नस को बढ़ाने के लिए किस FUND SOURCE कैसे इस्तेमाल कर रही है, और कंपनी मे प्रोमोटर्स के मुख्य शेयर होल्डिंग किस के पास है,
इस पोस्ट को पूरा पढने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद

और अगर ये आर्टिकल COMPANY FORMATION से IPO तक का सफ़र-2 ,आपको अच्छा लगा तो इसके नीचे अपना कमेन्ट करना न भूले,

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