"i सम्यक" बद्दल थोडक्यात

सम्यक समाजासाठी ६ बिंदूचा संस्कार - स्व अध्ययन - सामुहीकता - समत्व - सेवा - स्वातंत्र्य - संघर्ष.या ६ बिंदूचा संस्काराशी संबधित सर्व क्षेत्रां(अर्थशास्त्र, सेवाकार्य, विचार दर्शन, इतिहास व इतर) वर वाचन-लेखन -चर्चा-कार्यशाळा-सेवा-अनुभव या साठी "i सम्यक"
Our aim is to provide Education to people for social reform. Our thinking is Self Study - Togetherness - Equality - Self less Service - Freedom - Fight for right is the 6 point for Rite of society.

FUNDAMENTAL ANALYSIS

जब किसी कंपनी का शेयर, इस आधार पर ख़रीदा जाता है कि वह COMPANY आर्थिक रूप से INTERNALLY कितनी STRONG है , तो ऐसे में उस कंपनी का  FUNDAMENTAL ANALYSIS किया जाता है,
FUNDAMENTAL ANALYSIS में शेयर और शेयर से जुड़े अन्य तथ्यों के बारे में  बारीकी से STUDY किया जाता  है ,
जैसे कि शेयर जिस कंपनी का है , उस कंपनी से जुड़े लोग कौन कौन से है, उन लोगो कि PERSONAL BUSINESS EXPERIENCE और BACKGROUND क्या है, 
वह कंपनी क्या प्रोडक्ट बनाती है, फ्यूचर में उस PRODUCT का क्या डिमांड रहने वाला है ,
कंपनी में लाभ कमाने कि क्षमता क्या है,
कंपनी ने कब कितना LOSS या कब कितना PROFIT  कमाया ,
और COMPANY के पास कितनी सम्पति, कर्जे और CASH FLOW कितना है,
इस तरह हम फंडामेंटल एनालिसिस में हम ये चेक करते है कि स्टक आर्थिक रूप से कितना STRONG है, और उसका स्टॉक यानि वो कंपनी अपनी आर्थिक मजबूती और फ्यूचर में कितना ग्रोथ कर सकती है,

BASIC OF FUNDAMENTAL ANALYSIS

किसी स्टॉक में लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट के लिए हमें कंपनी के FUNDAMENTAL ANALYSIS पर ज्यादा ध्यान देना होता है, ताकि कंपनी मार्केट में शोर्ट टर्म उतार चढाव से आगे निकलकर हमें लॉन्ग टर्म में अच्छा लाभ दे,
और FUNDAMENTAL ANALYSIS से पहले हमें इसके कुछ BASICS को समझना भी जरुरी है, ध्यान देने वाली बात ये है कि FUNDAMENTAL ANALYSIS पूरी तरह किसी कंपनी और उसके बिज़नस से जुड़े अलग अलग बातो और FACTS के बारे अध्ययन करना होता है, 
ऐसे में सबसे पहले हमें एक BUSINESS और उसके शुरुआत से लेकर स्टॉक मार्केट में लिस्ट होने से पहले क्या क्या स्टेज से गुजरती है, इसके बारे में STUDY करना जरुरी है, 

STOCK कैसे ख़रीदे – HOW TO BUY STOCK


दोस्तों, एक सवाल आता है की, अब हम SHARE या STOCK कैसे ख़रीदे ? हमें पता है की शेयर बाजार से हम शेयर या STOCK खरीद सकते है, लेकिन STOCK MARKET से STOCK खरीदने के कितने विकल्प है,आज हम इसी के बारे में बात करेंगे की एक आम आदमी STOCK या SHARE कैसे ख़रीद सकता है ? STOCK कैसे ख़रीदे – HOW TO BUY STOCK ?
किसी भी कंपनी के शेयर या STOCK खरीदने के दो रास्ते है, जो STOCK EXCHANGE  है, –
  1. PRIMARY MARKET (प्राइमरी मार्केट)
  2. SECONDARY MARKET (सेकेंडरी मार्केट)

1.PRIMARY MARKET (प्राइमरी मार्केट) – IPO

जैसा की नाम से ही स्पष्ट हो जाता है, प्राइमरी यानी सबसे पहला MARKET, जहा पे किसी भी कंपनी द्वारा पहली बार शेयर्स, PUBLIC को बेचा जाता है, कंपनी द्वारा पहली बार शेयर जारी किये जाने को हम IPO यानी INITIAL PUBLIC OFFERING के नाम से भी जाना जाता है,
भारत में कोई भी कंपनी, जो PUBLIC को अपने SHARE बेचकर पूंजी प्राप्त करना चाहती है, तो उसे SEBI के नियमानुसार शर्तो को पूरा करते हुए लोगो को, पूंजी प्राप्त करने के लिए SHARE बेचने के समंध में , आम PUBLIC को इस बारे में बताने के लिए IPO ( INITIAL PUBLIC OFFERING) लाना होता है,
आम जनता इस तरह के IPO के जरिये डायरेक्टली शेयर्स या STOCK खरीद सकता है,
IPO से STOCK खरीदने के फायदे –
  1. SHARES के भाव पहले से एक PRICE BAND में तय रहते है, जहा कम से कम और ज्यादा से ज्यादा कीमत पहले से तय होता है ?
  2. SHARES के भाव आमतौर पर LISTED होने से पहले IPO में कम भाव में मिल जाते है ,

2. SECONDARY MARKET (सेकेंडरी मार्केट)

SECONDARY MARKET वास्तव में STOCK EXCHANGE पे होने वाले DAILY और REGULAR TRADE को कहते है, जहाँ शेयर्स हर समय खरीदने और बेचने के लिए उपलब्ध होता है”
एक बार SHARES PRIMARY MARKET के बाद जब STOCK MARKET में लिस्ट हो जाते है, तो सभी के लिए हर समय खरीदने और बेचने के लिए उपलब्ध हो जाते है, और इस ही हम STOCK MARKET या SECONDARY MARKET कहा जाता है,
इस तरह SECONDARY MARKET से शेयर्स या STOCK आम जनता MARKET भाव से SHARE कभी भी खरीद सकती है,
आशा है आप समझ पाए होंगे की शेयर्स खरीदने के लिए सिर्फ दो ही रास्ते है –
  1. PRIMARY MARKET (प्राइमरी मार्केट) – जिसे हम IPO के नाम से भी जानते है,
  2. SECONDARY MARKET (सेकेंडरी मार्केट) – जिसे हम STOCK MARKET के नाम से जानते है.

STOCK MARKET में स्टॉक का भाव कम ज्यादा क्यों होता है ?

दोस्तों,अक्सर मन में ये भी सवाल आता है, STOCK MARKET में स्टॉक का भाव कम ज्यादा क्यों होता है ? ऐसा क्या है की शेयर्स के भाव घटते और बढ़ते रहते है?
आज हम इसी बात को समझेंगे की आखिर SHARE MARKET में होने वाले उतार और चढाव, के पीछे क्या कारण है?
STOCK MARKET का सबसे मुख्य काम है, एक MARKET PLACE बनाना ,जहा  शेयर खरीदने वाले और बेचने वाले दोनों भी हमेशा मौजूद रहे,
और INDIAN STOCK MARKET में BSE और NSE बहुत सही तरह से अपनी भूमिका STOCK MARKET के रूप में निभा रहे है, 

शेयर्स के भाव में बदलाव – DEMAND AND SUPPLY

STOCK MARKET एक ऐसा MARKET PLACE है, जहा शेयर खरीदने और बेचने  के लिए  हमेशा BUYER और SELLER की DEMAND बनी रहती है, जो शेयर्स खरीदना और बेचना चाहते है,
और किसी भी बाजार को चलाने में DEMAND (मांग) और  SUPPLY (आपूर्ति) की मुख्य भूमिका होती है, और इस तरह DEMAND और SUPPLY के नियम से ही STOCK MARKET में उतार चढाव देखने को मिलता है,
जब SHARES की DEMAND अधिक होती है, तो SHARES के भाव बढ़ जाते है, और जब DEMAND कम होती है तो SHARES के भाव घट जाते है, 
और शेयर्स के भाव  घटने और बढ़ने से  बाजार का सूचकांक यानी BSE-SENSEX और NSE- NIFTY में भी उतार और चढाव देखने को मिलता है ,

शेयर्स के भाव में बदलाव – शेयर के प्रति नजरिया

STOCK MARKET में सिर्फ आकड़ो और पिछले तथ्यों के आधार पर अनुमान लगाया जाता है, की SHARES के भाव आगे क्या रहेंगे, एक ही STOCK के बारे में हर किसी की अलग अलग राय हो सकती है,
कोई उसे खरीदना चाहता है और कोई बेचना चाहता है , और इसी खरीदने और बेचने के अलग अलग नजरिये को लेकर ही लोग STOCK MARKET में STOCK खरीदने और बेचने का ORDER डालते है,
और लोगो के इन अलग अलग नजरिये और ORDERS के ऊपर DEMAND और SUPPLY के नियम से STOCK MARKET हमेशा काम करता रहता है, और डिमांड अधिक होने पे भाव बढ़ जाते है और DEMAND कम होने पे भाव कम हो जाते है,
STOCK MARKET में कोई भी व्यक्ति  अपने अनुमान के हिसाब से सही हो सकता है या गलत भी , कोई भी हमेशा एकदम सही सही अनुमान नहीं लगा सकता, STOCK MARKET ही सब कुछ स्पष्ट करता है, बाकि कोई दूसरा STOCK MARKET में होने वाले उतार चढाव को सही-सही नहीं बता सकता,
इस तरह हम समझ सकते है, की STOCK MARKET में जो लोग भाग लेते है, यानीं STOCK खरीदने और बेचने वाले लोगो को लेकर एक STOCK MARKET बन जाता है और इन खरीदने और बेचने वालो के मध्य एक DEMAND और SUPPLY का नियम काम करने लगता है, जिसकी वजह से शेयर के भाव में उतार और चढाव देखने को मिल जाता है,

STOCK MARKET में उतार -चढाव के कुछ कारण- 

वैसे तो STOCK MARKET में उतार चढाव के बहुत सारे कारण हो सकते है,उसमे कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार है,
  1. समाचार – (POSITIVE और NEGATIVE NEWS FROM GOVERNMENT)- समय- समय पर सरकारे अपनी नीतियों द्वारा अलग अलग क्षेत्रो के बिकास की योजनायें बनाती है, जैसे ही ऐसी कोई NEWS आती है की सरकार किसी अमुक क्षेत्र में विकास की योजना बनाने वाली है तो उस क्षेत्र से जुड़े शेयर्स की तरफ खरीदने वाले ज्यादा आते है, क्योकि इस से कंपनियों को ज्यादा लाभ होने की उम्मीद होती है, और ज्यादा लोगो के शेयर्स खरीदने की वजह से उस कंपनी के शेयर्स के भाव बढ़ जाते है, और ठीक इसके उलटे अगर कभी NEWS NEGATIVE हो यानी उस क्षेत्र के अनुकूल न होने पर उस क्षेत्र से जुड़े कंपनी के शेयर्स को लोग बेचना चाहते है, जिस से उस कंपनी के भाव कम हो जाते है,
  2. RESERVE BANK OF INDIA (RBI)- की नीतिया – 
  3. विश्व की अर्थव्यवस्था (GLOBAL ECONOMY IMPACT)
  4. सरकार की नीतिया 
  5. कम्पनी के लाभ कमाने की क्षमता – 
  6. कंपनी की अपनी नीतिया-
  7. कंपनी का MANAGEMENT-
इस तरह अन्य बहुत सारे कारण है जो STOCK MARKET के उतार-चढाव के अन्य बहुत सारे कारण है, जिसकी वजह से STOCK MARKET में हमेशा कुछ न कुछ होता रहता है और ये निरंतर चलता रहता है,
आशा है, आप समझ पाए होंगे, की STOCK MARKET कैसे काम करता है,  

स्टॉक मार्केट में निवेश


HOW TO INVEST IN STOCK MARKET IN INDIA,

ये पोस्ट आप सभी के लिए है, जो स्टॉक मार्केट में निवेश करना चाहते है, लेकिन निवेश के पूर्व अक्सर इस सवाल में उलझ जाते है कि आखिर स्टॉक मार्केट में निवेश की शुरआत कैसे करे?How to Invest In Stock Market?
आप को इस पोस्ट को पढ़ कर बिलकुल अच्छी तरह से समझ जायेंगे की स्टॉक मार्केट में निवेश कैसे किया जाता है,
Stock Market में निवेश करने के लिए आपको स्टॉक मार्केट में लिस्टेड कंपनी के स्टॉक खरीदने होंते है, और कोई भी स्टॉक खरीदने या बेचने के आप डायरेक्ट स्टॉक मार्केट में नहीं जा सकते,
आपको कोई भी शेयर खरीदने और बेचने के लिए एक स्टॉक ब्रोकर की जरुरत होती है, स्टॉक ब्रोकर के माध्यम से ही आप स्टॉक मार्केट से कोई भी शेयर खरीद और बेच सकते है,स्टॉक ब्रोकर वह महत्वपूर्ण कड़ी होता है, जो इन्वेस्टर को स्टॉक मार्केट तक पहुचाता है,
अब जब आप समझ चुके है कि आपको स्टॉक मार्केट में निवेश के लिए एक स्टॉक ब्रोकर की जरुरत है, ऐसे में जब भी आप किसी स्टॉक ब्रोकर के पास जाते है, तो स्टॉक ब्रोकर के पास आपके दो अकाउंट खोले जाते है-
१.       DEMAT ACCOUNT
२.       TRADING ACCOUNT
और आप जैसे ही आप किसी स्टॉक ब्रोकर के पास DEMAT और TRADING अकाउंट खोल लेते है, फिर उसके बाद आप आसानी से कोई भी शेयर खरीद और बेच सकते है,
स्टॉक मार्केट में शेयर खरीदना और उसे बेच कर लाभ कमाने को ही INVESTING IN STOCK MARKET कहा जाता है,
और इस तरह शेयर खरीदने के लिए,
आपको TRADING ACCOUNT की हेल्प से आप अपनी इक्क्षानुसार जिस भी कंपनी के जितने शेयर खरीदना चाहते है, उतने शेयर खरीदने के लिए आप अपने स्टॉक ब्रोकर के दिए गए सुविधानुसार TRADING PLATFORM का इस्तेमाल करके स्टॉक ब्रोकर के  पास अपना आर्डर PLACE करना होता है, अगर आपके ट्रेडिंग अकाउंट में शेयर खरीदने के लिए जरुरी रकम उपलब्ध है, तो आपका आर्डर VALID ORDER मानते हुए, स्टॉक ब्रोकर आपके आर्डर को स्टॉक मार्केट तक तुरन्त ही पंहुचा देता है, और कुछ ही सेकंड्स में आपके पास वो शेयर मिल जाते है,
ख़रीदे गए शेयर आपके DEMAT ACCOUNT में जमा हो जाते है,
और जब आपको शेयर बेचना होता है,
तो आप जो भी शेयर बेचना चाहते  है, उस शेयर  की उतनी QUANTITY बेचने का आर्डर आप स्टॉक ब्रोकर का TRADING PLATFORM का इस्तेमाल करके स्टॉक ब्रोकर के पास  PLACE कर सकते है, और स्टॉक ब्रोकर आके आर्डर को तुरंत ही स्टॉक मार्केट तक पंहुचा देता है,
और अगर स्टॉक मार्केट में शेयर की मांग यानी डिमांड होने पर कुछ ही सेकंड्स में आपके शेयर बिक जाते है,
 साथ ही साथ आपको ये भी याद रखना चाहिए कि स्टॉक मार्केट इन्वेस्टमेंट एक Risk भरा इन्वेस्टमेंट है, इसलिए स्टॉक मार्केट में इन्वेस्टमेंट करने से पूर्व आप नीचे बताई गई बातो पर भी जरुर ध्यान दे –

 POINTS TO NOTE BEFORE INVESTING IN STOCK MARKET

2.       आप स्टॉक मार्केट में निवेश के पीछे के investment goals को भी समझे,
3.       आप अपने स्टॉक मार्केट में इन्वेस्टमेंट पे रिस्क उठाने की क्षमता को समझे
4.       आप अपना खुद का investing style और strategy तैयार करे
5.       आप स्टॉक का वास्तविक मूल्य Fundamental की मदद से जरुर समझे
6.       आप एक ऐसा स्टॉक ब्रोकर चुने, जो कम फ़ीस में बेहतर सेवा दे
7.       आप उसी कंपनी का स्टॉक ख़रीदे, जिसका बिज़नस आपको समझ आता हो,
8.       स्टॉक मार्केट को एक बिज़नस की तरह समझे
9.       स्टॉक मार्केट में निवेश करते समय भावनाओ पर नियंत्रण रखे
10.   आपने जिन स्टॉक में निवेश किया है, उन पर रेगुलर नजर रखे
11.   स्टॉप लोस को समझे और उसका पालन करे
12.   मनी मैनेजमेंट और रिस्क और रिवॉर्ड को समझे और उसका बेहतर इस्तेमाल करे ,

आशा है आप इस पोस्ट को पढने के बाद आप समझ पाए होंगे की स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट कैसे किया जाता है,
अगर आपके मन में अब भी कोई सवाल है की स्टॉक मार्केट में कैसे इन्वेस्ट किया जाता है, तो आप नीचे कमेंट में अपने प्रश्न पूछ सकते है, जिसका जवाब हमारी तरफ आपको जल्द से जल्द मिल जायेगा,  

वॉरेन बफे


वॉरेन बफे – महान निवेशक,

वॉरेन बफे एक ऐसा नाम जो किसी भी परिचय का मोहताज नहीं है, आप चाहे कोई भी हो, आप स्टॉक मार्केट में रूचि रखते हो या नहीं लेकिन फिर भी दुनिया के सबसे अमीर में शामिल आदमी “वॉरेन बफे” एक ऐसा नाम है, जो आपने जरुर सुना होगा,
स्टॉक मार्केट से कोई कितना कमा सकता है, और कितना अमीर बन सकता है – इसके सम्बन्ध में अमेरिका के “वॉरेन बफे” का उदहारण सबसे पहले लिया जाता है,
आज ०२ फरवरी २०१८ को वॉरेन बफे का आज कुल नेट वर्थ है – 85 बिलियन U.S. डॉलर
अगर भारतीय रूपये में बात करे तो वॉरेन बफे की कुल सम्पति है – लगभग 6 लाख करोड़ रूपये,
(1बिलियन = 100 करोड़)
1 बिलियन डॉलर = 6700 करोड़)
और वो पिछले कई दशको से इस दुनिया के टॉप 10 अमीर लोगो की सूची में बने हुए है,
क्या आप यकीन कर सकते है – एक इन्सान जो अपनी शुरुआत 100 डॉलर से करता है, क्या वो 56 लाख करोड़ रूपये बना सकता है,
जी हां,
ये बिल्कुल सच है, और इसी बात का जीगता जागता उदहारण है – वॉरेन बफे
और सबसे मजेदार बात ये है कि उन्होंने इतना सारा पैसा और दौलत, निवेश के जरिये बनाया हुआ है,
जी हा निवेश करके,
उन्होंने 5000 रूपये से शुरुआत करके 56 लाख करोड़ बनाने वाले इस इन्सान को इसी कारण इस दुनिया का अब तक का सबसे महान, सबसे बड़ा, सबसे सफल निवेशक के नाम से जाना जाता है,
वॉरेन बफे को उनकी सफलता और अथाह संपति के कारण उन्हें कई और नामो से भी जाना जाता है , जैसे – स्टॉक मार्केट का जादूगर, ओमाहा के ओरेकल, और जब 2006 में उन्होंने अपनी संपति का एक बहुत बड़ा हिस्सा दान करने के कारण उन्हें इस सदी का सबसे बड़े दानी भी कहा जाता है,
आप विकिपीडिया पर हिंदी में वारेन वफे के बारे में पूरी जीवन चक्र और सफलता के बारे में पढ़ सकते है –
आइये हम यहाँ वॉरेन बफे के जीवन पर एक नजर डालते है ,

वॉरेन बफे का बचपन

वॉरेन बफे का जन्म 30 अगस्त 1930 को नेब्रास्का राज्य के ओमाहा शहर में हुआ जो यूनाइटेड स्टेट अमेरिका में स्थित है, उनके माता-पिता का नाम हावर्ड और लीला (स्टाल) था,
उनके पिता एक स्टॉक ब्रोकर थे और वॉरेन बफे शायद इसी कारण स्टॉक मार्केट और बिज़नस के बारे में बचपन से ही बहुत रूचि लेने लगे, वॉरेन बफे ने 6 वर्ष की छोटी उम्र में भी बिज़नस करना समझ आने लगा और उन्होंने 6 वर्ष की छोटी उम्र में बिज़नस करना शुरू भी कर दिया, जब एक किराने की दुकान से कोको कोला की कुछ बोतलें खरीदी और उसको कुछ लाभ के साथ दुसरो को बेचा,
बचपन में जब उनकी उम्र के बच्चे खेलने कूदने में व्यस्त थे, तो वॉरेन बफे ने बिज़नस और पैसे को ही अपना खेल कूद समझ कर ऐसे बहुत छोटे छोटे बिज़नस कर पैसे कमाने के तरीके पर काम कर रहे थे जैसे – अख़बार बेचना, और अलग अलग सामानों की स्टाल लगा कर बेचना,
वॉरेन बफे ने 11 वर्ष की उम्र में स्टॉक मार्केट में शेयर खरीदना भी शुरू कर दिया था और पहले सौदे के रूप में Cities Service नाम की कंपनी का स्टॉक 38 DOLLAR के भाव से ख़रीदा, लेकिन इस स्टॉक का भाव कुछ ही दिन में 27 डॉलर हो गया, लेकिन बिना घबराये वॉरेन बफे ने धैर्य से काम लिया, और कुछ दिन बाद वापस जब स्टॉक का भाव 40 हो गया, तब उन्होंने वो स्टॉक बेच दिया,
और स्टॉक मार्केट में निवेश के लाभ के सम्बन्ध में पहला सबक यही सिखा कि –
स्टॉक मार्किट निवेश में धैर्य से काम ले, (Keeping patience is a key in stock market)

वॉरेन बफे की शिक्षा

वॉरेन बफे का बचपन 1947 में 17 वर्ष की उम्र के हो चुके थे, और उन्होंने वूड्रो विल्सन हाई स्कूल वॉशिंगटन,से High school की अपनी पढाई भी पूरी कर ली थी,
उनकी कॉलेज जाकर पढाई करने की बहुत ज्यादा इक्क्षा नहीं थी, लेकिन पिता के समझाने पर उन्होंने पेन्सिल्वेनिया यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया, जहा उन्होंने सिर्फ दो साल पढाई की, और बाद में वहा से पढाई ये कहकर छोड़ दी कि – वहा के प्रोफ़ेसर उनसे कम जानते है,
बाद में उन्होंने अपना ग्रेजुएशन नेब्रास्का लिंकन यूनिवर्सिटी से पूरा किया, और बाद में उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढने के लिए अप्लाई किया, जहा हार्वर्ड ने वॉरेन बफे की कम उम्र को देखते हुए उनका Application रिजेक्ट कर दिया,
वॉरेन बफे को चूकी बिज़नस और स्टॉक मार्केट में सबसे ज्यादा रूचि थी और उस समय बेंजामिन ग्राहम के विचारों नें उनके ऊपर इस कदर प्रभाव छोड़ा की उनसे सीधे शिक्षा प्राप्त करने के लिए वो Columbia Business Schoolमें एडमिशन लिया, कोलंबिया बिज़नस स्कूल से बेंजामिन ग्राहम की क्लास से A+ ग्रेड पाने वाले एकमात्र विद्यार्थी थे, और वहा से अर्थशास्त्र में M.S. की डिग्री ली, जिसने उनकी पूरी जिंदगी को बदल दिया,

वॉरेन बफे – LIFE CHANGING MOMENT,

कितने संयोग की बात है कि वॉरेन बफे के जन्म के 1 साल पहले सन 1929 में अमेरिका का स्टॉक मार्केट बहुत बुरी तरह से निचे गिरा था और 80 % से भी ज्यादा की गिरावट आई थी, और इसके बाद 1930 में जन्म होता है – वॉरेन बफे का,
लेकिन 21 वर्ष की उम्र तक वॉरेन बफे पढाई पूरी कर चुके थे, और वे बेंजामिन ग्राहम द्वारा लिखित पुस्तक SECURITY ANALYSIS और The Intelligent Investor से बहुत ही अधिक प्रभावित हुए, और आज इतनी अथाह दौलत के मालिक वॉरेन बफे बेंजामिन ग्राहम की किताब The Intelligent Investor को स्टॉक मार्केट इन्वेस्टमेंट के ऊपर लिखी गई सर्वश्रेष्ठ पुस्तक मानते है,
वॉरेन बफे ने इस किताब और इस किताब के लेखक बेंजामिन ग्राहम के समपर्क में आने की घटना को अपनी जिंदगी बदल देंने वाली घटना मानते है,
इसके आलावा अपने कैरियर की शुरुआत में जब वो ज्यादा कुछ नहीं कर पार रहे थे तो एक और लाइफ चेंजिंग घटना ये थी की वॉरेन बफे को पब्लिक स्पीकिंग और बेहतर कम्युनिकेशन के लिए डेल कार्नेगी की क्लासेज में गए, और इसने उनके जीवन को बदल दिया था,

वॉरेन बफे के गुरु – बेंजामिन ग्राहम

बेंजामिन ग्राहम, वॉरेन बफे के गुरु है, और जहा तक बेंजामिन ग्राहम की बात है, तो बेंजामिन ग्राहम सन 1920 में भी एक जानीमानी हस्ती थे, और ऐसे स्टॉक ढूंढने में माहिर थे, जो एक दम सस्ता, लाभकारी, और रिस्क फ्री हो,
बेंजामिन ग्राहम ने स्टॉक मार्केट के ऊपर 40 साल की उम्र में किताब लिखी – सिक्यूरिटी एनालिसिस
और उसके बाद 1950 के आस पास उनकी दूसरी किताब आई – The intelligent Investor,
The Intelligent Investor किताब में सिंपल तरीके से “Principal of Intrinsic Value बताई है, जिसका अर्थ है आपको स्टॉक मार्केट में निवेश, स्टॉक प्राइस को देखने के बजाये, ये देखना चाहिए कि जिस कंपनी का स्टॉक है, उसकी नेट वर्थ क्या है, और नेट वर्थ के अनुसार उस स्टॉक का क्या होना चाहिए और अभी मार्केट में वो स्टॉक क्या भाव पे भाव चल रहा है,
और अगर आप को स्टॉक का intrinsic value, मार्केट प्राइस से ज्यादा लगता है, तो आपको उस स्टॉक मे निवेश करना चाहिए,
और अगर स्टॉक का intrinsic value, मार्केट प्राइस से कम लगता है, तो आपको उस स्टॉक मे निवेश नहीं करना चाहिए,
वॉरेन बफे इस तरीके के Simple और effective सेट ऑफ़ रूल्स में बहुत विस्वाश है, और वो ऐसे ही कुछ सिंपल रूल्स पे आज भी निवेश करते है,
खैर, वॉरेन बफे की स्टॉक मार्केट में अच्छी जानकारी के बावजूद, बेंजामिन ग्राहम और उनके पिता ने उनको स्टॉक मार्केट से शुरुआत में दूर रहने और अमेरका के स्टॉक मार्केट वाल स्ट्रीट पर काम नहीं करने की ही सलाह दी थी,
इसके बाद वॉरेन बफे अपने गुरु बेंजामिन ग्राहम से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने ग्राहम के साथ फ्री में काम करने का ऑफर दिया, लेकिन ग्राहम ने इसे भी मना कर दिया,
वॉरेन बफे पढाई पूरी कर 22 साल की उम्र में जब उनके पिता और गुरु ने स्टॉक मार्केट से दूर रहने की सलाह दी तो वो ज्यादा कुछ कर नहीं पा रहे थे, और ऐसे में उन्होंने पिताजी के ब्रोकरेज हाउस में ही एक जॉब करने लगे,
इसी बीच वॉरेन बफे और सूजी थोम्प्सन के बीच भी रिलेशनशिप बढ़ने लगा और बाद में अप्रैल 1952 में दोनों ने शादी की, और वॉरेन बफे को एक बेटी हुई जिसका नाम भी उनकी पत्नी की तरह सूजी ही रखा गया,
इस बीच वॉरेन बफे की आर्थिक हालात उतने अच्छे नहीं थे, और वो 65 डॉलर किराये के मकान में रहते थे, और पैसे बचाने के लिए अपनी छोटी से बेटी का बिस्तर उन्होंने ड्रेसर के Drawer में ही बना दिया था,
और वॉरेन बफे ने दो छोटे छोटे बिज़नस में पार्टनरशिप कर रखी थी – टेक्साको स्टेशन और कुछ रियल एस्टेट में, मगर उन्हें कुछ खास सफलता नहीं मिल रही थी, और ये उनके कैरियर की शुरुआत का संघर्ष था,
और इस बीच उन्होंने अपनी पब्लिक स्पीकिंग और कम्युनिकेशन स्किल पे काम किया, और तभी लाइफ चेंजिंग घटना हुई और वारेन बफे के गुरु बेंजामिन ग्राहम ने उनको अपने पास काम करने का ऑफर दिया, जिसका वारेन बफे लम्बे समय से इन्तेजार कर रहे थे,

वारेन बफे और बेंजामिन ग्राहम साथ साथ

जब वारेन बफे ने अपने गुरु बेंजामिन ग्राहम के साथ काम करना शुरू किया, तब उनको अमेरिका के स्टॉक एक्सचेंज और इंडेक्स S&P के रिपोर्ट को एनालाइज करने का काम मिला, और इस तरह वो निवेश के नए मौको की तलाश करना लगे,
गुरु के साथ काम करते करते , वारेन बफे और बेंजामिन ग्राहम दोनों के निवेश के तरीके में थोडा अंतर आना शुरू हुआ,
बेंजामिन ग्राहम जहा कंपनी की बैलेंस शीट और इनकम स्टेटमेंट पर ध्यान देते थे, और कंपनी में निवेश करते समय सिर्फ नंबर की बात करते थे, और कॉर्पोरेट लीडरशिप पर ज्यादा ध्यान नहीं देते थे,
वही दूसरी तरफ वॉरेन बफे कंपनी के निवेश के लिए कंपनी मैनेजमेंट को बहुत ज्यादा महत्व देते थे, और इस बात का भी का ध्यान देते थे कि जिस कंपनी में वे निवेश करे उस कंपनी में ऐसा क्या खास है जो उस कंपनी को उसके प्रतिद्वंद्वी कम्पनी से अलग करती है,

BUFFETT ASSOCIATES, LTD. की शुरुआत

इस बीच 1956 तक वॉरेन बफे ने काम करते हुए अपनी बचत को 9800 डॉलर को निवेश के जरिए 1 लाख 40 हजार डॉलर बनाने में कामयाब रहे थे,
इसके बाद वॉरेन बफे अपने रिश्तेदारों में से 7 लोगो के साथ Buffett Associates, Ltd. की शुरुआत की, और शुरुआत में कुल 1 लाख 5 हजार पूंजी के रुप में जुटाया, और साल के अंत तक उनकी पूंजी 3 लाख डॉलर हो चूकी थी,
अब वॉरेन बफे की जिंदगी बदलने लगी थी, अब वो दिन पर दिन अधिक सफल होते जा रहे थे, और उनके द्वारा किया जाने वाला निवेश बहुत अच्छा लाभ देने लगा, और अपने स्टॉक निवेश के लिए अपने शहर में मशहूर होने लगे थे,
वॉरेन बफे के पास काफी सारे लोग अपने निवेश करने के लिए टिप लेने आये और उनसे सलाह मांगी , लेकिन वॉरेन बफे स्टॉक मार्केट निवेश के लिए टिप लेने और देने को गलत मानते थे, और उन्होंने कभी भी किसी को इस तरह की टिप या सलाह नहीं दी,
1962 तक वॉरेन बफे की कंपनी की कुल पूंजी 7.5 मिलियन डॉलर तक पहुच चूका था, जिसमे 1 मिलियन का हिस्सा वॉरेन बफे का था,
और इस तरह वॉरेन बफे ने बहुत सारे अलग अलग अमेरिका के लगभग 90 बिज़नस में पार्टनरशिप की, जिसमे उनको निवेश करना ठीक लगा,
और उन्होंने जितनी भी कंपनी में पार्टनरशिप की उन सभी को एक कंपनी Buffett Partnerships Ltd में मिला दिया,
इसके बाद उनकी कंपनी ने बहुत लाभ कमाए और इस तरह वॉरेन बफे के निवेश के फैसलों ने बहुत बेहतर रिजल्ट भी दिया और 1668 तक उनकी कंपनी के पास कुल पूंजी 104 मिलियन US डॉलर तक पहुच चूकी थी,
इस बीच उनका सबसे बड़ा निवेश था – Berkshire Hathaway

वॉरेन बफे और BERKSHIRE HATHAWAY

वॉरेन बफे ने अपना सारा ध्यान अब बर्कशायर हैथवे पर लगा दिया, और इस कंपनी उन्हने अपना खुद का 49% शेयर खरीद लिया था, और उसके डायरेक्टर बने,
हालाँकि ये कंपनी एक बहुत बुरे दौर से गुजर रही थी, और लगभग डूबने के कगार पर थी, और वॉरेन बफे ने अपनी सूझ बुझ से कंपनी के मैनेजमेंट में फेर बदल की और कंपनी को चलाने की नए पोलिसी बनाये, और पूरी तरह कण्ट्रोल अपने हाथ में लिया हुआ था,
और अपनी सूझ बुझ और बिज़नस की समझ और निवेश के फैसलों से उनकी ये कंपनी 1970 तक प्रॉफिट देने लगी और उनका अपने निवेश का वैल्यू 140 मिलियन डॉलर तक पहुच चूका था,
वॉरेन बफे ने इस कंपनी के शेयर कभी नहीं बेचे, और सिर्फ सी कंपनी से मिलने वाली सैलरी से ही अपना जीवन यापन किया, उनका जीवन महान था, वो सदा जीवन और उच्च विचार वाले इन्सान थे,
उन्होंने अपनी सैलरी के इनकम से भी निवेश किया और कुछ ही समय उस निवेश को उन्होंने 3 मिलियन डॉलर तक पंहुचा दिया था, लेकिन अपनी बर्कशायर हैथवे के शेयर को कभी नहीं बेचा,
वॉरेन बफे का बिज़नस 1983 तक काफी मजबूती से आगे बढ़ने लगा था, और साल दर साल उनका NET WORTH बढ़ने लगा, और उन्होंने बहुत ही ज्यादा लाभ कमाए,
हालाँकि आज अगर हम उनकी कुल सफलता का हिसाब लगाने बैठे तो उन्होंने आज 85 बिलियन की दौलत को सिर्फ 21 % सलाना CAGR लाभ की दर से कमाया हुआ है,