"i सम्यक" बद्दल थोडक्यात

सम्यक समाजासाठी ६ बिंदूचा संस्कार - स्व अध्ययन - सामुहीकता - समत्व - सेवा - स्वातंत्र्य - संघर्ष.या ६ बिंदूचा संस्काराशी संबधित सर्व क्षेत्रां(अर्थशास्त्र, सेवाकार्य, विचार दर्शन, इतिहास व इतर) वर वाचन-लेखन -चर्चा-कार्यशाळा-सेवा-अनुभव या साठी "i सम्यक"
Our aim is to provide Education to people for social reform. Our thinking is Self Study - Togetherness - Equality - Self less Service - Freedom - Fight for right is the 6 point for Rite of society.

कदम मिलाकर चलना होगा। - अटल बिहारी वाजपेयी


बाधायें आती हैं आयें 
घिरें प्रलय की घोर घटायें, 
पावों के नीचे अंगारे, 
सिर पर बरसें यदि ज्वालायें, 
निज हाथों में हंसते-हंसते, 
आग लगाकर जलना होगा। 
कदम मिलाकर चलना होगा। 


हास्य-रूदन में, तूफानों में, 
अगर असंख्यक बलिदानों में, 
उद्यानों में, वीरानों में, 
अपमानों में, सम्मानों में, 
उन्नत मस्तक, उभरा सीना, 
पीड़ाओं में पलना होगा। 
कदम मिलाकर चलना होगा। 


उजियारे में, अंधकार में, 
कल कहार में, बीच धार में, 
घोर घृणा में, पूत प्यार में, 
क्षणिक जीत में, दीघर हार में, 
जीवन के शत-शत आकर्षक, 
अरमानों को ढ़लना होगा। 
कदम मिलाकर चलना होगा। 


सम्मुख फैला अगर ध्येय पथ, 
प्रगति चिरंतन कैसा इति अब, 
सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ, 
असफल, सफल समान मनोरथ, 
सब कुछ देकर कुछ न मांगते, 
पावस बनकर ढ़लना होगा। 
कदम मिलाकर चलना होगा। 


कुछ कांटों से सज्जित जीवन, 
प्रखर प्यार से वंचित यौवन, 
नीरवता से मुखरित मधुबन, 
परहित अर्पित अपना तन-मन, 
जीवन को शत-शत आहुति में, 
जलना होगा, गलना होगा। 
कदम मिलाकर चलना होगा।



-अटल बिहारी वाजपेयी

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