"i सम्यक" बद्दल थोडक्यात

सम्यक समाजासाठी ६ बिंदूचा संस्कार - स्व अध्ययन - सामुहीकता - समत्व - सेवा - स्वातंत्र्य - संघर्ष.या ६ बिंदूचा संस्काराशी संबधित सर्व क्षेत्रां(अर्थशास्त्र, सेवाकार्य, विचार दर्शन, इतिहास व इतर) वर वाचन-लेखन -चर्चा-कार्यशाळा-सेवा-अनुभव या साठी "i सम्यक"
Our aim is to provide Education to people for social reform. Our thinking is Self Study - Togetherness - Equality - Self less Service - Freedom - Fight for right is the 6 point for Rite of society.

उस रोज़ दिवाली होती है ~ अटल बिहारी वाजपेयी


उस रोज़ दिवाली होती है,   
जब मन में हो मौज-बहारों की ,
चमकाए चमक सितारों की ,
जब खुशियों के शुभ घेरे हों
तन्हाई में भी मेले हों
आनंद की आभा होती है ,
उस रोज़ दिवाली होती है।।
             
जब प्रेम के दीपक जलते हों ,
सपने जब सच में बदलते हों ,
मन में हो मधुरता भावों की ,
जब लहकें फसलें चावों की ,
उत्साह की आभा होती है ,
उस रोज़ दिवाली होती है ।।
             
जब प्रेम से मीत बुलाते हों ,
दुश्मन भी गले लगाते हों ,
जब कहीं किसी से वैर न हो ,
सब अपने हों कोई ग़ैर न हो ,
अपनत्व की आभा होती है ,
उस रोज़ दिवाली होती है।।
             
जब तन-मन-जीवन सज जाए ,
सद्भाव के बाजे बज जाएं ,
महकाए खुशबू खुशियों की ,
मुस्काए चंदनिया सुधियों की ,
तृप्ति की आभा होती है ,
उस रोज़ दिवाली होती है ।। 

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