"i सम्यक" बद्दल थोडक्यात

सम्यक समाजासाठी ६ बिंदूचा संस्कार - स्व अध्ययन - सामुहीकता - समत्व - सेवा - स्वातंत्र्य - संघर्ष.या ६ बिंदूचा संस्काराशी संबधित सर्व क्षेत्रां(अर्थशास्त्र, सेवाकार्य, विचार दर्शन, इतिहास व इतर) वर वाचन-लेखन -चर्चा-कार्यशाळा-सेवा-अनुभव या साठी "i सम्यक"
Our aim is to provide Education to people for social reform. Our thinking is Self Study - Togetherness - Equality - Self less Service - Freedom - Fight for right is the 6 point for Rite of society.

कारागृह ही स्वाधीनता के, साधना पीठ बन जाते हैं।




अपने आदर्शों और विश्वासों 
के लिए काम करते-करते, 
मृत्यु का वरण करना 
सदैव ही स्पृहणीय है। 
किन्तु 
वे लोग सचमुच धन्य हैं 
जिन्हें लड़ाई के मैदान में, 
आत्माहुति देने का 
अवसर प्राप्त हुआ है। 
शहीद की मौत मरने 
का सौभाग्य 
सब को नहीं मिला करता। 
जब कोई शासक 
सत्ता के मद में चूर होकर 
या, 
सत्ता हाथ से निकल जाने के भय से 
भयभीत होकर 
व्यक्तिगत स्वाधीनता और स्वाभिमान को 
कुचल देने पर 
आमादा हो जाता है, 
तब 
कारागृह ही स्वाधीनता के 
साधना पीठ बन जाते हैं।

No comments: