"i सम्यक" बद्दल थोडक्यात

सम्यक समाजासाठी ६ बिंदूचा संस्कार - स्व अध्ययन - सामुहीकता - समत्व - सेवा - स्वातंत्र्य - संघर्ष.या ६ बिंदूचा संस्काराशी संबधित सर्व क्षेत्रां(अर्थशास्त्र, सेवाकार्य, विचार दर्शन, इतिहास व इतर) वर वाचन-लेखन -चर्चा-कार्यशाळा-सेवा-अनुभव या साठी "i सम्यक"
Our aim is to provide Education to people for social reform. Our thinking is Self Study - Togetherness - Equality - Self less Service - Freedom - Fight for right is the 6 point for Rite of society.

वैभव के अमिट चरण-चिह्न



विजय का पर्व! 
जीवन संग्राम की काली घड़ियों में 
क्षणिक पराजय के छोटे-छोट क्षण 
अतीत के गौरव की स्वर्णिम गाथाओं के 
पुण्य स्मरण मात्र से प्रकाशित होकर 
विजयोन्मुख भविष्य का 
पथ प्रशस्त करते हैं। 

अमावस के अभेद्य अंधकार का— 
अन्तकरण 
पूर्णिमा का स्मरण कर 
थर्रा उठता है। 

सरिता की मँझधार में 
अपराजित पौरुष की संपूर्ण 
उमंगों के साथ 
जीवन की उत्ताल तरंगों से 
हँस-हँस कर क्रीड़ा करने वाले 
नैराश्य के भीषण भँवर को 
कौतुक के साथ आलिंगन 
आनन्द देता है। 

पर्वतप्राय लहरियाँ 
उसे 
भयभीत नहीं कर सकतीं 
उसे चिन्ता क्या है ? 

कुछ क्षण पूर्व ही तो 
वह स्वेच्छा से 
कूल-कछार छोड़कर आया 
उसे भय क्या है ? 
कुछ क्षण पश्चात् ही तो 
वह संघर्ष की सरिता 
पार कर 
वैभव के अमिट चरण-चिह्न 
अंकित करेगा। 

हम अपना मस्तक 
आत्मगौरव के साथ 
तनिक ऊँचा उठाकर देखें 
विश्व के गगन मंडल पर 
हमारी कलित कीर्ति के 
असंख्य दीपक जल रहे हैं। 

युगों के बज्र कठोर हृदय पर 
हमारी विजय के स्तम्भ अंकित हैं। 
अनंत भूतकाल 
हमारी दिव्य विभा से अंकित हैं। 

भावी की अगणित घड़ियाँ 
हमारी विजयमाला की 
लड़ियाँ बनने की 
प्रतीक्षा में मौन खड़ी हैं। 

हमारी विश्वविदित विजयों का इतिहास 
अधर्म पर धर्म की जयगाथाओं से बना है। 
हमारे राष्ट्र जीवन की कहानी 
विशुद्ध राष्ट्रीयता की कहानी है।

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