"i सम्यक" बद्दल थोडक्यात

सम्यक समाजासाठी ६ बिंदूचा संस्कार - स्व अध्ययन - सामुहीकता - समत्व - सेवा - स्वातंत्र्य - संघर्ष.या ६ बिंदूचा संस्काराशी संबधित सर्व क्षेत्रां(अर्थशास्त्र, सेवाकार्य, विचार दर्शन, इतिहास व इतर) वर वाचन-लेखन -चर्चा-कार्यशाळा-सेवा-अनुभव या साठी "i सम्यक"
Our aim is to provide Education to people for social reform. Our thinking is Self Study - Togetherness - Equality - Self less Service - Freedom - Fight for right is the 6 point for Rite of society.

कोई पिया से मिलावे



तु फागुन नियरानी हो, कोई पिया से मिलावे ॥ ॥


सोई तो सुदंर जाके पिया को ध्यान है, सोइ पिया के मन मानी।

खेलत फाग अगं नहिं मोड़े, सतगुरु से लिपटानी ॥ १ ॥


इक इक सखियाँ खेल घर पहुँची, इक इक कुल अरुझानी ।
इक इक नाम बिना बहकानी, हो रही ऐंचातानी ॥ २ ॥



पिय को रूप कहाँ लग बरनौं, रूपहि माहिं समानी ।
जौ रँगे रँगे सकल छबि छाके, तन- मन सभी भुलानी ॥ ३ ॥ 



यों मत जाने यहि रे फाग है, यह कछु अकथ कहानी ।
कहैं कबीर सुनो भाई साधो, यह गति बिरले जानी ॥ ४ ॥


- कबीर

No comments: